सिर के बायीं तरफ़ दर्द होना एक आम समस्या है, लेकिन इसके पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं। कुछ लोगों को हल्का दर्द महसूस होता है, जबकि कुछ को तेज़ धड़कन जैसा दर्द, आंख के आसपास दबाव या सिर में भारीपन महसूस हो सकता है। यह दर्द कुछ समय में ठीक हो सकता है या बार-बार परेशान कर सकता है। कई बार इसकी वजह तनाव, नींद की कमी या माइग्रेन जैसी समस्या होती है। वहीं, कुछ स्थितियों में सिरदर्द किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है। इसलिए दर्द की तीव्रता, अवधि और उसके साथ दिखाई देने वाले अन्य लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है। सही कारण का पता चलने पर उचित उपचार चुनना आसान होता है।
सिर के एक तरफ़ दर्द होने के पीछे जीवनशैली से जुड़े कारणों से लेकर कुछ चिकित्सीय स्थितियां तक हो सकती हैं। दर्द के स्थान से ही हमेशा उसके सही कारण का पता नहीं चलता। इसके लिए अन्य लक्षणों और व्यक्ति की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को भी समझना जरूरी होता है।
माइग्रेन सिर के एक तरफ़ होने वाले दर्द का एक प्रमुख कारण है। इसमें अक्सर सिर के एक हिस्से में धड़कन जैसा मध्यम से तेज़ दर्द होता है। यह दर्द कुछ घंटों से लेकर कई दिनों तक रह सकता है। इसके साथ मतली, उल्टी, रोशनी या तेज़ आवाज़ से परेशानी भी हो सकती है। शारीरिक गतिविधि करने से दर्द बढ़ सकता है। हालांकि, हर व्यक्ति में माइग्रेन के लक्षण एक जैसे नहीं होते और कुछ लोगों को दोनों तरफ़ भी दर्द हो सकता है।
मानसिक तनाव, चिंता, लंबे समय तक कंप्यूटर या मोबाइल का इस्तेमाल और गलत तरीके से बैठने के कारण गर्दन तथा कंधों की मांसपेशियों में खिंचाव हो सकता है। इससे सिर में दबाव या कसाव जैसा दर्द महसूस हो सकता है। तनाव से जुड़ा सिरदर्द आमतौर पर दोनों तरफ़ होता है, लेकिन कभी-कभी एक तरफ़ अधिक महसूस हो सकता है। पर्याप्त आराम न करना और लगातार काम करते रहना इस परेशानी को बढ़ा सकता है।
साइनस में सूजन या संक्रमण होने पर माथे, गालों और आंखों के आसपास दबाव या दर्द महसूस हो सकता है। यदि यह परेशानी मुख्य रूप से बायीं तरफ़ हो, तो सिर के उस हिस्से में भी दर्द महसूस हो सकता है। नाक बंद होना, नाक बहना और चेहरे पर दबाव इसके साथ दिखाई दे सकते हैं।
आंखों पर अधिक जोर पड़ने, चश्मे के गलत नंबर या लंबे समय तक स्क्रीन देखने से भी सिरदर्द हो सकता है। हालांकि, आंख में अचानक तेज़ दर्द, लालिमा या धुंधला दिखाई देना किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है और ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
इसके अलावा, नींद की कमी, भोजन देर से करना, शरीर में पानी की कमी और कैफीन की मात्रा में अचानक बदलाव भी सिरदर्द को बढ़ा सकते हैं।
सिरदर्द के साथ दिखाई देने वाले लक्षण उसके संभावित कारण को समझने में मदद कर सकते हैं। हर व्यक्ति में लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए दर्द के साथ होने वाले बदलावों पर ध्यान देना जरूरी है।
बायीं तरफ़ सिरदर्द होने पर कुछ लोगों को सिर में भारीपन, दबाव, धड़कन जैसा दर्द या गर्दन में अकड़न महसूस हो सकती है। माइग्रेन होने पर मतली, उल्टी, रोशनी और आवाज़ के प्रति संवेदनशीलता भी हो सकती है। कुछ लोगों को थकान, चक्कर जैसा महसूस होना या ध्यान लगाने में परेशानी होती है।
यदि सिरदर्द के साथ बुखार, गर्दन में अकड़न, लगातार उल्टी, देखने में परेशानी या शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी हो, तो इसे सामान्य सिरदर्द मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
दर्द की प्रकृति उसके संभावित कारण के बारे में कुछ जानकारी दे सकती है। धड़कन जैसा दर्द माइग्रेन में देखा जा सकता है, जबकि सिर पर कसाव या दबाव जैसा दर्द तनाव से जुड़े सिरदर्द में हो सकता है। आंख के आसपास बहुत तेज़ दर्द, खासकर आंख से पानी आने या नाक बंद होने के साथ, क्लस्टर सिरदर्द जैसी स्थिति में दिखाई दे सकता है।
हालांकि, केवल दर्द के स्वरूप या उसके स्थान के आधार पर किसी बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती। सही आकलन के लिए डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
बायीं तरफ़ सिरदर्द माइग्रेन का संकेत हो सकता है, लेकिन हर बार इसका कारण माइग्रेन ही हो, यह जरूरी नहीं है। माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिसमें सिरदर्द के साथ कई अन्य लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। यदि दर्द बार-बार होता है, सामान्य कामकाज प्रभावित करता है या रोशनी और आवाज़ से परेशानी होती है, तो डॉक्टर से परामर्श लेना उचित है।
सामान्य तनाव संबंधी सिरदर्द में अक्सर सिर के दोनों तरफ़ दबाव या कसाव महसूस होता है। इसके विपरीत, माइग्रेन में दर्द अक्सर एक तरफ़ होता है और उसकी तीव्रता मध्यम से गंभीर हो सकती है। माइग्रेन के दौरान मतली, उल्टी और रोशनी या आवाज़ से परेशानी अधिक आम है। हालांकि, लक्षणों में समानता हो सकती है, इसलिए केवल इन अंतर के आधार पर स्वयं निदान नहीं करना चाहिए।
कुछ परिस्थितियां माइग्रेन के दौरे को बढ़ा सकती हैं। इनमें अनियमित नींद, भोजन छोड़ना, तनाव, शरीर में पानी की कमी, तेज़ रोशनी, तेज़ गंध और कुछ खाद्य पदार्थ शामिल हो सकते हैं। हार्मोनल बदलाव भी कुछ लोगों में माइग्रेन को प्रभावित करते हैं। हर व्यक्ति के ट्रिगर अलग हो सकते हैं। सिरदर्द की डायरी रखने से यह समझने में मदद मिल सकती है कि किन परिस्थितियों में दर्द अधिक होता है।
अधिकतर सिरदर्द गंभीर बीमारी के कारण नहीं होते, लेकिन कुछ लक्षण तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत बताते हैं। विशेष रूप से अचानक शुरू होने वाला असामान्य रूप से तेज़ सिरदर्द गंभीर हो सकता है।
निम्नलिखित लक्षणों को गंभीरता से लेना चाहिए:
इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी आपातकालीन चिकित्सा सेवा लें। अचानक तेज़ सिरदर्द या शरीर के एक तरफ़ कमजोरी होने पर स्वयं गाड़ी चलाकर अस्पताल न जाएं। चिकित्सकीय सहायता मिलने में देरी न करें और बिना सलाह के दवाओं से लक्षण दबाने की कोशिश न करें। यदि सिरदर्द नया है, लगातार बढ़ रहा है या पहले होने वाले दर्द से अलग है, तो जल्द डॉक्टर से जांच करवाएं।
सिरदर्द का कारण जानने के लिए डॉक्टर सबसे पहले लक्षणों और स्वास्थ्य संबंधी इतिहास की जानकारी लेते हैं। इसके बाद जरूरत के अनुसार शारीरिक और न्यूरोलॉजिकल जांच की जा सकती है। हर मरीज को एक जैसी जांच कराने की आवश्यकता नहीं होती।
डॉक्टर जानना चाह सकते हैं कि दर्द कब शुरू हुआ, कितनी देर रहता है, कितनी बार होता है और उसकी तीव्रता कितनी है। वे यह भी पूछ सकते हैं कि दर्द के साथ मतली, उल्टी, आंखों में परेशानी, चक्कर या रोशनी से संवेदनशीलता होती है या नहीं। पहले से मौजूद बीमारियां, इस्तेमाल की जा रही दवाएं, नींद, तनाव और सिर में चोट का इतिहास भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
यदि सिरदर्द के लक्षण माइग्रेन या तनाव संबंधी सिरदर्द से मेल खाते हैं और जांच में कोई चिंताजनक संकेत नहीं मिलता, तो हमेशा स्कैन की जरूरत नहीं होती। लेकिन अचानक तेज़ दर्द, न्यूरोलॉजिकल लक्षण, सिर में चोट या अन्य असामान्य संकेत होने पर डॉक्टर सीटी स्कैन, एमआरआई या रक्त जांच की सलाह दे सकते हैं। कौन-सी जांच आवश्यक है, यह मरीज की स्थिति और डॉक्टर के आकलन पर निर्भर करता है।
सिरदर्द का उपचार उसके कारण, गंभीरता और बार-बार होने की स्थिति पर निर्भर करता है। सही कारण का पता लगने के बाद डॉक्टर उचित दवा, जीवनशैली में बदलाव या अन्य उपचार की सलाह दे सकते हैं।
हल्का सिरदर्द होने पर शांत और कम रोशनी वाली जगह पर आराम करना, पर्याप्त पानी पीना और समय पर भोजन करना मददगार हो सकता है। यदि लंबे समय तक स्क्रीन देखने से दर्द बढ़ता है, तो बीच-बीच में ब्रेक लें। गर्दन और कंधों को आराम देना भी उपयोगी हो सकता है।
दर्द निवारक दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर या फार्मासिस्ट की सलाह के अनुसार ही करें। इन दवाओं का बार-बार इस्तेमाल कभी-कभी सिरदर्द को और बढ़ा सकता है। यदि दर्द लगातार बना रहता है या बार-बार लौटता है, तो केवल दवाओं से राहत पाने के बजाय डॉक्टर से परामर्श लें।
बार-बार होने वाले सिरदर्द के लिए डॉक्टर उसके कारण के अनुसार उपचार तय करते हैं। माइग्रेन में दौरे के समय दर्द कम करने वाली दवाएं और कुछ मामलों में दौरे रोकने के लिए नियमित दवाएं दी जा सकती हैं। तनाव संबंधी सिरदर्द में नींद सुधारना, तनाव कम करना और मांसपेशियों को आराम देने वाले उपाय उपयोगी हो सकते हैं।
यदि सिरदर्द किसी दूसरी स्वास्थ्य समस्या के कारण हो रहा है, तो उस समस्या का उपचार करना जरूरी है। दवाओं की खुराक स्वयं न बदलें और लंबे समय तक दर्द निवारक दवाएं लेने से पहले चिकित्सकीय सलाह अवश्य लें।
सिरदर्द के सभी मामलों को रोकना संभव नहीं है, लेकिन कुछ आदतें इसकी आवृत्ति और परेशानी को कम करने में मदद कर सकती हैं।
यदि इन उपायों के बावजूद सिरदर्द बार-बार हो रहा है, तो डॉक्टर से जांच करवाना बेहतर है।
बायीं तरफ़ सिरदर्द होने के पीछे माइग्रेन, तनाव, मांसपेशियों में खिंचाव, आंखों से जुड़ी परेशानी और जीवनशैली से संबंधित कई कारण हो सकते हैं। दर्द की तीव्रता, अवधि और उसके साथ दिखाई देने वाले लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है। हल्के सिरदर्द में आराम, पर्याप्त पानी और नियमित दिनचर्या से राहत मिल सकती है। हालांकि, बार-बार होने वाले दर्द या अचानक शुरू हुए तेज़ सिरदर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर डॉक्टर से परामर्श लेने से सही कारण का पता लगाने और उचित उपचार प्राप्त करने में मदद मिलती है।
बायीं तरफ सिरदर्द के सामान्य कारणों में माइग्रेन, तनाव संबंधी सिरदर्द, मांसपेशियों में खिंचाव और नींद की कमी शामिल हैं। सही कारण का पता लक्षणों और चिकित्सकीय जांच से चलता है।
हां, माइग्रेन में अक्सर सिर के एक तरफ़ धड़कन जैसा दर्द होता है। इसके साथ मतली, उल्टी और रोशनी या आवाज़ से परेशानी हो सकती है। हालांकि, हर एकतरफा सिरदर्द माइग्रेन नहीं होता।
माइग्रेन, आंखों पर अधिक जोर पड़ना और कुछ प्रकार के सिरदर्द के कारण आंख के आसपास दर्द हो सकता है। आंख में अचानक तेज़ दर्द, लालिमा या धुंधला दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।
माइग्रेन, पानी की कमी, रक्तचाप में बदलाव और कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में सिरदर्द के साथ चक्कर आ सकते हैं। यदि चक्कर अचानक आएं या उनके साथ कमजोरी, बोलने में परेशानी अथवा संतुलन बिगड़ने जैसे लक्षण हों, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
यदि सिरदर्द बार-बार होता है, लगातार बना रहता है, बढ़ रहा है या दैनिक गतिविधियों को प्रभावित करता है, तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए। अचानक बहुत तेज़ दर्द या अन्य गंभीर लक्षण होने पर आपातकालीन सहायता लें।
हां, तनाव के कारण सिरदर्द हो सकता है। हालांकि, तनाव संबंधी सिरदर्द आमतौर पर दोनों तरफ़ महसूस होता है, लेकिन कभी-कभी एक तरफ़ अधिक परेशानी हो सकती है।
जांच लक्षणों और डॉक्टर के आकलन पर निर्भर करती है। जरूरत पड़ने पर सीटी स्कैन, एमआरआई या रक्त जांच की जा सकती है। हर मरीज को स्कैन कराने की जरूरत नहीं होती।
Your journey to better health starts here schedule your consultation today.
Expert fertility care with advanced treatments, compassionate support, and personalized plans for your parenthood journey.
Advanced bone and joint care with modern techniques and personalized rehab to help you move pain-free and live stronger.
Advanced urology care with minimally invasive treatments and personalized plans to restore your health and confidence.
Located opposite the ST Bus Stand in Panvel, our hospital is easily accessible by road and rail, making it convenient for patients from Navi Mumbai and surrounding areas.

022 61567000 / 01 / 02 / 03

info@lifelinepanvel.com

Lifeline Hospital, Opp. ST Bus Stand, NH 4, Panvel, Navi Mumbai, Maharashtra - 410206
Monday to Saturday - 8:00 AM to 8:00 PM
Available 24/7

We’ve received your details successfully. Our care team will reach out to you within 30 minutes to guide you further. We look forward to helping you.
Get call back in 30 minutes
Get Call Back In 30 Min

We’ve received your details successfully. Our care team will reach out to you within 30 minutes to guide you further. We look forward to helping you.